बिहार की मशहूर ‘शाही लीची’ के नाम एक और उपलब्धि, मिलेगा GI टैग

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उत्तरी बिहार की मशहूर शाही लीचीको नया मुकाम मिलने वाला है। जरदालू आम, कतरनी चावल, और मगही पान के बाद अब शाही लीचीको जिऑग्रफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग के रूप में पहचान मिलने वाली है। ज्ञात हो कि बिहार के जर्दालु आम, मगही पान और कतरनी धान को जीआइ टैग (ज्योग्रफिकल इंडिकेशन) मिल चुका है|

इस साल के 5 जून के जिऑग्रफिकल इंडिकेशन जर्नल में शाही लीची के बारे में विस्तार से बताया गया है।

जीआई जर्नल नंबर 107 में जिक्र
जीआई जर्नल के नंबर 107 में प्रकाशित चैप्टर में शाही लीची की विशेषताओं का जिक्र है। इसमें जीआई का नाम, विवरण, कृषि विधि के साथ-साथ उत्पादन और उत्पत्ति का प्रमाण शामिल है। जर्नल में कहा गया है, ‘यह लीची की एक खास प्रकार की प्रजाति है। राज्य के मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, बेगूसराय और बिहार के एग्रो क्लाइमेटिक जोन-1 के निकटवर्ती इलाकों में मुख्य रूप से इसकी खेती होती है। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और उसके आस-पास के इलाकों में पैदा होनेवाली लीची काफी रसदार और शुगर ऐसिड सम्मिश्रण के साथ बेहतरीन खुशूबू वाली होती है।’

‘कैल्शियम की वजह से बेहतरीन लीची’
जर्नल में आगे कहा गया, ‘ऐसा कहा जाता है कि मिट्टी में कैल्शियम की उच्च मात्रा की वजह से यहां की लीची दूसरे इलाकों से बेहतर होती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि अगर मिट्टी में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा न हो तो लीची का नया पौधा लगाते वक्त मिट्टी में चूना मिलाना चाहिए।’

3 लाख मीट्रिक टन पैदावार में 60% शाही लीची
बिहार के प्रमुख सचिव (कृषि) सुधीर कुमार ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘वित्तीय वर्ष 2017-18 में बिहार में लीची की अलग-अलग किस्मों की 3 लाख मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। इनमें से 60 प्रतिशत हिस्सा शाही लीची का था।’

जीआई टैग मिलने में अभी तीन महीने का इंतजार करने का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, ‘मुजफ्फरपुर के लीची उत्पादक संघ ने बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, सबौर के सहयोग से यह पहल की है। गर्मी के इस फल की बढ़ती मांग के बीच शाही लीची के कृषि क्षेत्र और उत्पादन दोनों में इजाफे के बाद यह कदम उठाया गया है।’

अब बिहार के दावे को तीन महीने तक पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा| अगर किसी राज्य ने इस दौरान कोई आपत्ति नहीं जतायी तो शाही लीची पर केवल बिहार का एकाधिकार होगा| साल 2016 के अक्टूबर में बिहान द्वारा भागलपुर के कतरनी धान, जर्दालु आम और मगही पान समेत शाही लीची को जीआइ टैग दिलाने के लिए आवेदन किया गया था|

 

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